न दैन्यं न पलायनम्

27.12.14

पृथु जीवन के प्रथम वर्ष पर

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पृथु, जीवन के प्रथम वर्ष पर, नहीं समझ में आता, क्या दूँ ? नहीं रुके, घुटनों के राही, घर के चारों कोनो में ही, तुमने ढूँढ़ लिये जग अपन...
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24.12.14

याद आती हो

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मेरे दिन-रात चाहें, बस तुम्हारी याद में रहना, सुबह बन गुनगुनाती, रात बनकर गीत गाती हो ।।१।। नहीं अब है सताती, जीवनी ही स्वप्न में डूबी,...
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20.12.14

आँख-मिचौनी

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फिर आँखों को यूँ फिरा लिया, क्यों आँख-मिचौनी करती हो । क्यों गहरी अपनी आँखों में, कुछ बात छिपाये रहती हो ।। भाव पुरातन, शब्द नये हैं, क...
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17.12.14

कटु यथार्थ

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अनुपस्थित   अब   तक   जीवन   से ,   थी   अश्रुत्पादित   यथार्थता , दोषों का अम्बार दिखेगा, ऐसा मैने सोचा ना था । इस शतरंजी राजनीति म...
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13.12.14

कुछ निमन्त्रण

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आज   कुछ   बरसात   की   बूँदें   बरसती   और   हवा   भी , बह रही उन्मुक्त होकर और कोयल कूजती हैं, औ’ मदित सा धुन्ध छाना चाहता निर्बाध ह...
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10.12.14

आया कोई याद हृदय में

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आया   कोई   याद   हृदय   में , सुखदायी अनुनाद हृदय में । तनिक विहँस कर हौले हौले, कह जाता संवाद हृदय में ।।१।। कहाँ छिपा था, मन ...
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6.12.14

बिताये हुये पल

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बिताये   थे   जो   पल ,   कभी   संग   तेरे , वो बनकर उमड़ते हैं, यादों के बादल । बड़ी सोहती है, वो छाहों की ठंडक, रहूँ काश ऐसी, बहार...
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3.12.14

क्या जो मैनें पा लिया

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और   कहने   को   बहुत   कुछ ,   जो   था   मैने   पा   लिया , किन्तु पहचानों की गहरी छाँह में छिपता गया ।।१।। कभी उड़ता था हवा में, ध...
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29.11.14

आँखों के अभिवादन

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लाख   चाहकर ,   बात   हृदय   की ,   कहने   से   हम   रह   जाते   है   । तेरी आँखों के अभिवादन, बात हजारों कह जाते हैं ।। बहुत चित्र...
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26.11.14

मन अपना ही था

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आस   जगी   थी ,   लगा   लगन   में , उड़ता पंछी नील-गगन में, ताल समय की, थापों पर जो,  झूम रहा मन अपना ही था ।।१।। उत्सुकता के फू...
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22.11.14

एक अपरिचित सन्नाटा

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एक   अपरिचित   सन्नाटा   सा   पीछे   पीछे   भाग   रहा , दिन को दिन में जी लेता, पर रात अकेले होता हूँ । कृत्रिम मुस्कानों से, मन की ...
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19.11.14

तुझे अब उठना होगा

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विरह प्रतीक्षा पीड़ा ही है, आँखे भी अनवरत बही हैं, मन में जिसका रूप बसाया, देखो, वह निष्ठुर न आया।   जीवन, पर क्यों रूठ, कहीं अट...
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15.11.14

प्रियतम

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खोजता   दो   नेत्र ,   जिनमें   स्वयं   को   पहचान   लूँ   मैं , आप आये, पंथ को विश्राम मिल गया है । प्रेम की दो बूँद चाही, किन्तु स...
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12.11.14

प्रेम-प्लावन

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प्रेम - प्लावित   हो   गया   मन , पा गया अभिराम चिन्तन । खोज में कब से तुम्हारी, भटकता अविराम जीवन ।। साधना का प्रात और वह ज्ञान...
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8.11.14

जाने कितने ऋण बाकी हैं

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मुश्किल   है   ढोना   कृतघ्नता , चुभते अब समझौते भी हैं । अर्पण जो तुझको करने हैं, जाने कितने ऋण बाकी हैं ।। रमकर तेरे उपकरणों म...
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5.11.14

मन्दगति

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कौन कहता है, ये जीवन दौड़ है, कौन कहता है, समय की होड़ है, हम तो रमते थे स्वयं में, आँख मूँदे तन्द्र मन में, आपका आना औ जाना, ...
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1.11.14

स्वप्न सुनहला

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स्वप्न   सुनहला   देखा   मैंने , सुन्दर चेहरा देखा मैंने । मन में संचित चित्रण को, बन सत्य पिघलते देखा मैंने ।।१।। आनन्दित जागृत...
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29.10.14

सत्य सदैव अबल है

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मन   की   दिशा   प्रबल   है , तर्क, बुद्धि सब यन्त्र प्राय हैं, सत्य सदैव अबल है । आज समाज कालिमा पर, क्यों श्वेत रिक्तता पोत रहा ...
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25.10.14

खोज सुख की

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प्रेम   की   पिपास   अन्तर्निहित   है   जो , घूमते चहुँ ओर उसके कर्म सारे । दे सके जो हर किसी को प्रेम तृप्ति, बिका उसको कौड़ियों के...
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22.10.14

मेरा भगवन

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वह सुन्दर से भी सुन्दरतम, वह ज्ञान सिन्धु का गर्भ-गहन, वह विस्तृत जग का द्रव्य-सदन, वह यशो-ज्योति का उद्दीपन, वह वन्दनीय, वह आरा...
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