न दैन्यं न पलायनम्

29.11.14

आँखों के अभिवादन

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लाख   चाहकर ,   बात   हृदय   की ,   कहने   से   हम   रह   जाते   है   । तेरी आँखों के अभिवादन, बात हजारों कह जाते हैं ।। बहुत चित्र...
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26.11.14

मन अपना ही था

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आस   जगी   थी ,   लगा   लगन   में , उड़ता पंछी नील-गगन में, ताल समय की, थापों पर जो,  झूम रहा मन अपना ही था ।।१।। उत्सुकता के फू...
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22.11.14

एक अपरिचित सन्नाटा

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एक   अपरिचित   सन्नाटा   सा   पीछे   पीछे   भाग   रहा , दिन को दिन में जी लेता, पर रात अकेले होता हूँ । कृत्रिम मुस्कानों से, मन की ...
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19.11.14

तुझे अब उठना होगा

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विरह प्रतीक्षा पीड़ा ही है, आँखे भी अनवरत बही हैं, मन में जिसका रूप बसाया, देखो, वह निष्ठुर न आया।   जीवन, पर क्यों रूठ, कहीं अट...
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15.11.14

प्रियतम

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खोजता   दो   नेत्र ,   जिनमें   स्वयं   को   पहचान   लूँ   मैं , आप आये, पंथ को विश्राम मिल गया है । प्रेम की दो बूँद चाही, किन्तु स...
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12.11.14

प्रेम-प्लावन

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प्रेम - प्लावित   हो   गया   मन , पा गया अभिराम चिन्तन । खोज में कब से तुम्हारी, भटकता अविराम जीवन ।। साधना का प्रात और वह ज्ञान...
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8.11.14

जाने कितने ऋण बाकी हैं

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मुश्किल   है   ढोना   कृतघ्नता , चुभते अब समझौते भी हैं । अर्पण जो तुझको करने हैं, जाने कितने ऋण बाकी हैं ।। रमकर तेरे उपकरणों म...
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5.11.14

मन्दगति

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कौन कहता है, ये जीवन दौड़ है, कौन कहता है, समय की होड़ है, हम तो रमते थे स्वयं में, आँख मूँदे तन्द्र मन में, आपका आना औ जाना, ...
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1.11.14

स्वप्न सुनहला

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स्वप्न   सुनहला   देखा   मैंने , सुन्दर चेहरा देखा मैंने । मन में संचित चित्रण को, बन सत्य पिघलते देखा मैंने ।।१।। आनन्दित जागृत...
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29.10.14

सत्य सदैव अबल है

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मन   की   दिशा   प्रबल   है , तर्क, बुद्धि सब यन्त्र प्राय हैं, सत्य सदैव अबल है । आज समाज कालिमा पर, क्यों श्वेत रिक्तता पोत रहा ...
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25.10.14

खोज सुख की

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प्रेम   की   पिपास   अन्तर्निहित   है   जो , घूमते चहुँ ओर उसके कर्म सारे । दे सके जो हर किसी को प्रेम तृप्ति, बिका उसको कौड़ियों के...
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22.10.14

मेरा भगवन

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वह सुन्दर से भी सुन्दरतम, वह ज्ञान सिन्धु का गर्भ-गहन, वह विस्तृत जग का द्रव्य-सदन, वह यशो-ज्योति का उद्दीपन, वह वन्दनीय, वह आरा...
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18.10.14

मूल्य चुकाने बैठा हूँ

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सहसा मन में घिर आयी, वो रात बिताने बैठा हूँ तुमसे पाये हर सुख का अब मूल्य चुकाने बैठा हूँ  भावों का उद्गार प्रस्फुटित, आतुर मन के ...
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15.10.14

चला हूँ देर तक

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चला   हूँ   देर   तक ,   यादें   बहुत   सी   छोड़   आया   हूँ   । अनेकों बन्धनों को, राह ही में तोड़ आया हूँ ।। १।। लगा था, साथ कोई ...
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11.10.14

स्वप्न-सुन्दरी

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खड़ी   कहीं   पर   दूर ,   कल्पना   के   अनन्त   विस्तारों   में , सुख मदिरा में चूर, नियन्त्रित नहीं मनस उद्गारों में, यौवन से भरपूर ...
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8.10.14

झूला बन क्यों झूम रहा हूँ

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झूला   बन   क्यों   झूम   रहा   हूँ   । नियत दिशा है, बढ़ते जाना, ज्ञान-कोष का वृहद खजाना, किन्तु हृदय की लोलुपता है, मन में कुछ...
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4.10.14

समय

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मैं   टूट   रहा   प्रतिपल ,   प्रतिक्षण ,   वह   भाग   रहा   अपनी   गति   से , मैं खड़ा हुआ संवेदित मन, वह टले नहीं निज नियमों से । मै...
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1.10.14

मनस अब स्थिर होता है

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हमारे   जीवन   का   बिखराव , दिखाता   हमें   अनेकों   राह   । छीनता   जीवन   का   सारल्य , दिलाकर   अन्धकार   का   स्याह   ।। १।। ...
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27.9.14

शान्ति प्रतीक्षित

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स्थिरता   तो   प्राप्य   नहीं   अब , मन अशान्ति को स्वतः सुलभ है । धरो हाथ पर हाथ नहीं अब, शान्ति प्रयत्नों का प्रतिफल है ।।१।। ...
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24.9.14

कह जाने दो

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मन   में   दुख   का   भार   उठाये , अपने बिम्बों में सकुचाये, भीगी पलकों में आँखों की, मन के गहरे भाव छिपाये, कब तक अँसुअन को रोको...
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