न दैन्यं न पलायनम्
28.9.13
अभिव्यक्ति का आकार - ब्लॉग, फेसबुक व ट्विटर
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सूत्र - व्यसन या विवशता अष्टाध्यायी के पृष्ठ पलट रहा था, आश्चर्य कर रहा था कि कैसे इतने छोटे छोटे सूत्रों में पाणिनी ने सारा व्याकरण स...
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25.9.13
मेरे लिये विद्यालय
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मेरा विद्यालय आज २५ वर्ष बाद उसी विशालकक्ष में खड़ा हूँ, जहाँ पर आचार्यों के उद्बोधनों ने सदा ही आगे बढ़ने को प्रेरित किया था। उसी विश...
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21.9.13
साइकिल, टेण्ट और सूखे मेवे
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नीरज की वर्तमान में की गयी साइकिल यात्रा के दो अन्य साथी भी थे, उनका अपना टेण्ट और बैग में पड़े सूखे मेवे। इन दोनों के सहारे उन्होने तो ब...
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18.9.13
एप्पल - एक और दिशा निर्धारण
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नया स्वरूप जैसा कि पुरानी पोस्ट में संभावना व्यक्त की थी, एप्पल ने आईफ़ोन के दो मॉडल उतारे, पॉलीकार्बोनेट काया का आईफ़ोन 5सी व धातुका...
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14.9.13
पर्यटन - स्थानीय पक्ष
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एक बार आपकी यात्रा पूरी होती है तो अगली चिन्ता होती है, रुकने की। किसी स्थान में ठहरने का उद्देश्य तीन बातों के लिये होता है, पहला स्नानाद...
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11.9.13
पर्यटन - रेल अपेक्षायें
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रेलवे और पर्यटन पर कहीं भी विचार विमर्श होता है तो कई बाते हैं जो सदा ही सुनने को मिलती हैं। बहुधा बहुत अधिक सुनना पड़ता है, कभी सुझाव के ...
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7.9.13
अगला एप्पल कैसा हो
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जब कभी भी एप्पल का नया उत्पाद आने वाला होता है, अपेक्षाओं की एक लम्बी सूची बन जाती है। हो भी क्यों न, किसी भी क्षेत्र में नायकों से यह आशा...
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4.9.13
पर्यटन - आनन्द का कार्य
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हमारी श्रीमतीजी को पर्यटन संबंधी पुस्तकें और आलेख पढ़ने में रुचि है। बड़े ही संक्षिप्त अन्तरालों में उनकी रुचि, रह रहकर अनुभव में बदल जाना...
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31.8.13
पर्यटन - एक शैली
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जब गांधीजी दक्षिण अफ्रीका में अपना प्रयोग सफल करने के बाद भारत आये, उनके राजनैतिक गुरु गोपालकृष्ण गोखले ने उन्हें पूरे देश का भ्रमण करने क...
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28.8.13
पर्यटन, रेल और नीरज जाट
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नीरज जाट का नाम लेते ही, उनके द्वारा लिखे गये न जाने कितने यात्रा वृत्तान्त मन में कौंध जाते हैं। एक छवि जो किसी साइकिल में लेह की ऊँचाइय...
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24.8.13
नाम, शब्द, रूप
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भाषा से उत्पन्न तरंग मन के मार्ग से होते हुये तुरीय अवस्था तक पहुँच गयी। तरंग यदि सीमित होती तो चर्चा संभवतः दो या तीन पोस्ट में समाप्त हो...
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21.8.13
मन - स्वरूप, कार्य, अवस्थायें
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इस बात में तो कोई संशय रहा नहीं कि मानव की भाषा मन की भाषा नहीं है। वाह्य ज्ञान के संकेतों को हम जिस रूप में ग्रहण करते हैं, उन्हें हम कही...
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17.8.13
मन की सम्यक व्याख्या
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पाश्चात्य दर्शन मन की सतही व्याख्या करता है। उसके अनुसार मन की दो ही अवस्थायें हैं, चेतन और अवचेतन। चेतन मन समझता है, सोचता है, याद रखता ह...
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14.8.13
मन की थाह
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मेरे चित्रकार मित्र आलोक मुझे सल्वाडोर डाली के बारे में बता रहे थे। डाली बड़े ही चर्चित चित्रकार रहे हैं, अपने चित्रों से भी अधिक अपने व्...
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10.8.13
मन की भाषायी चेतना
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मन की भाषा के प्रश्न का प्रारम्भ तो ज्ञानदत्तजी के सरल से अवलोकन से हुआ था, पर वह छोटी सी प्रतीत होने वाली लहर अपने अन्दर इतनी उत्सुकता ल...
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