न दैन्यं न पलायनम्
29.6.13
महीने भर का ऱाशन या महीने भर का लेखन
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सप्ताहान्त के दो दिन यदि न होते तो संभवतः सृष्टि अब तक विद्रोह कर चुकी होती, या सृष्टि तब तक ही चल पाती, जब तक चलने दी जाती। वे सारे कार्...
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26.6.13
बोझ प्रधान देश का बचपन
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मुझे लगता है कि बोझ का जितना स्तर अपने देश में है, उतना विश्व के किसी देश में नहीं है। कोई ऐसे तथ्य तो नहीं हैं जिनके आधार पर मैं यह सिद्...
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22.6.13
औरों को हम
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आदर्शों की छोटी चादर, चलो ढकेंगे, औरों को हम। आंकाक्षा मन पूर्ण उजागर, चलो छलेंगे, औरों को हम। इसकी उससे तुलना करना, चलो ...
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19.6.13
जो है, सो है
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अपने मित्र आलोक की फेसबुक पर बदले चित्र पर ध्यान गया, उसमें कुछ लिखा हुआ था। आलोक प्रमुखतः चित्रकार हैं और उसके सारे चित्रों में कुछ न कु...
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15.6.13
मैकबुक मिनी
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नहीं, एप्पल ने किसी नये उत्पाद की घोषणा नहीं की है, यह मेरे नये प्रयोग का नाम है। इसके पीछे एक रोचक कहानी है, एक परिवर्धित सततता है, एक सु...
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12.6.13
खिड़की पर गिलहरी
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घर की जिस मेज पर बैठ कर लेखन आदि कार्य करता हूँ, उसके दूसरी ओर एक खिड़की है। उसमें दो पल्ले हैं, बाहर की ओर काँच का, अन्दर की ओर जाली का,...
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8.6.13
टावर किचेन से ब्लॉगिंग
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इस बार इंडीब्लॉगर के मिलने का स्थान था, यूबी सिटी। यह स्थान विजय माल्या जी का है, जी हाँ किंगफिशर वाले और यहीं पर ही उनका मुख्यालय भी है। ...
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5.6.13
वाकू डोकी
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कुछ दिन पहले टोयोटा से दो अधिकारी मिलने आये थे, टोयोटा की एक फ़ैक्टरी बंगलोर के पास में ही है। आपसी हित के विषय पर बातचीत थी। जब विषय पर ...
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1.6.13
विश्व जियेगा
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विश्व जियेगा और गर्भरण जीते बिटिया, प्रथम युद्ध यह और जीतना होगा उसको, संततियों का मोह, नहीं यदि गर्भधारिणी, सह ले सृष्टि बिछोह, कौन...
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29.5.13
मानसिक विलास
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एक मित्र महोदय से कहा कि इस नगर में कोई ऐसा स्थान बतायें जहाँ चार पाँच घंटे शान्तिपूर्वक मिल सकें, पूर्ण निश्चिन्तता में। मित्र महोदय संश...
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25.5.13
अच्छा लगता है, जब बच्चे सिखाते हैं
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बच्चे, पता ही नहीं चलता है, कब बड़े हो जाते हैं? कल तक लगता था कि इन्हें अभी कितना कुछ सीखना है, साथ ही साथ हम यही सोच कर दुबले हुये जा र...
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22.5.13
स्वयं से भागते, हम लोग
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कभी सोचा है कि व्यक्ति को सबसे अधिक भड़भड़ाहट कब होती है, सर्वाधिक मन कब ऊबता है, कौन सा समय वह शीघ्रातिशीघ्र बिता देना चाहता है? उत्तर अ...
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18.5.13
नदी का सागर से मिलन
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पहली बार देख रहा था, एक नदी का सागर से मिलना। स्थान कारवार, नदी काली और अरब सागर। दोपहर के समय ऊपर से पड़ने वाली सूरज की किरणें पसरी नील...
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15.5.13
दुआ सबकी मिल गयी, अच्छा हुआ
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एक माह पहले जन्मदिन पर ढेरों बधाइयाँ आयी थीं, मन सुख से प्लावित हो गया था। आँखें बन्द की तो बस यही शब्द बह चले। यद्यपि फेसबुक पर इसे डाल च...
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11.5.13
ब्लॉग व्यवस्था, तृप्त अवस्था
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गूगल रीडर में बढ़ते बढ़ते ब्लॉगों की संख्या ६५० के पार पहुँच गयी। तकनीक और न्यूनतम जीवन शैली विषयक लगभग ५० ब्लॉग निकाल दें, तब भी हिन्दी स...
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8.5.13
लहरें
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तकते हैं, लहरें आती और जाती हैं। लखते हैं, कुछ लाती, कुछ ले जाती हैं। छकते हैं, इठलाती, हमें खिलाती हैं। इनके जैसे ही सतत...
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4.5.13
अनमोल जीवन
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विश्व वंचित कर रहा है, है सकल संवाद स्थिर, दृष्टि में दिखती उपेक्षा, भाव तम एकांत में घिर। मान लो संकेत है यह, कर्म एकल, श्वेत ...
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