न दैन्यं न पलायनम्

29.5.13

मानसिक विलास

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एक मित्र महोदय से कहा कि इस नगर में कोई ऐसा स्थान बतायें जहाँ चार पाँच घंटे शान्तिपूर्वक मिल सकें, पूर्ण निश्चिन्तता में। मित्र महोदय संश...
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25.5.13

अच्छा लगता है, जब बच्चे सिखाते हैं

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बच्चे, पता ही नहीं चलता है, कब बड़े हो जाते हैं? कल तक लगता था कि इन्हें अभी कितना कुछ सीखना है, साथ ही साथ हम यही सोच कर दुबले हुये जा र...
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22.5.13

स्वयं से भागते, हम लोग

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कभी सोचा है कि व्यक्ति को सबसे अधिक भड़भड़ाहट कब होती है, सर्वाधिक मन कब ऊबता है, कौन सा समय वह शीघ्रातिशीघ्र बिता देना चाहता है? उत्तर अ...
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18.5.13

नदी का सागर से मिलन

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पहली बार देख रहा था, एक नदी का सागर से मिलना। स्थान कारवार, नदी काली और अरब सागर। दोपहर के समय ऊपर से पड़ने वाली सूरज की किरणें पसरी नील...
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15.5.13

दुआ सबकी मिल गयी, अच्छा हुआ

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एक माह पहले जन्मदिन पर ढेरों बधाइयाँ आयी थीं, मन सुख से प्लावित हो गया था। आँखें बन्द की तो बस यही शब्द बह चले। यद्यपि फेसबुक पर इसे डाल च...
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11.5.13

ब्लॉग व्यवस्था, तृप्त अवस्था

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गूगल रीडर में बढ़ते बढ़ते ब्लॉगों की संख्या ६५० के पार पहुँच गयी। तकनीक और न्यूनतम जीवन शैली विषयक लगभग ५० ब्लॉग निकाल दें, तब भी हिन्दी स...
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8.5.13

लहरें

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तकते हैं, लहरें आती और जाती हैं। लखते हैं, कुछ लाती, कुछ ले जाती हैं। छकते हैं, इठलाती, हमें खिलाती हैं। इनके जैसे ही सतत...
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4.5.13

अनमोल जीवन

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विश्व वंचित कर रहा है, है सकल संवाद स्थिर, दृष्टि में दिखती उपेक्षा, भाव तम एकांत में घिर। मान लो संकेत है यह, कर्म एकल, श्वेत ...
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1.5.13

कृपया, घंटी बजायें

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रविवार को जब भी कोई कार्यक्रम होता है, लगता है कोई आपकी निजता पर हस्तक्षेप कर रहा है। इंडीब्लॉगर उत्साही ब्लॉगरों की एक संस्था है जो ब्लॉ...
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27.4.13

और कब तक

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लम्बी   कितनी   राह   चलेंगे , कब घर का आराम मिलेगा? कब तक सूखे चित्र बनेंगे, रंग कब चित्रों में उतरेगा? कब विरोध के मेघ छटेंगे, ...
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24.4.13

फन वेव, हिट वेव

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सागर की लहरों में खेलना किसे नहीं भाता है, विशेषकर जब लहरें आपके आकार की आ रही हों। खेल का रोमांच भी वहीं पर होता है, जहाँ पर तनिक जूझना ...
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20.4.13

अकेला

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आज   जीवन   के   समर   में ,   खड़ा   हूँ   बिल्कुल   अकेला , पक्ष में मेरे भी मैं हूँ, और विरोधी भी स्वयं ही, पन्थ का पन्थी भी मैं हूँ...
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17.4.13

एक दुपहरी

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एक दुपहरी, गर्म नहीं, गुनगुनी, मन अकेला, व्यग्र नहीं, अनमना, मिलकर सोचने लगे, क्या करें, समय का रिक्त है, कैसे भरें, कुछ उत्पादक, स...
54 comments:
13.4.13

बस, स्वीकार कर लें

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चर्चा चल रही थी, पीड़ा पर, बड़ा ही विचित्र विषय था चर्चा के लिये। वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले कहेंगे कि जिस तत्व को माप ही नहीं सकते, उस पर ...
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10.4.13

गोवा, दक्षिण से

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जितने लोग भी गोवा आते हैं, अधिकांशतः उत्तर दिशा से अवतरित होते हैं और वहीं से ही घूम कर चले जाते हैं। हम भी कोई अपवाद नहीं, ६ बार जा चुके...
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6.4.13

अँधेरे को बाहर फेंकना है

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एक दिन देवेन्द्र जी ने एक कहानी सुनायी जो बचपन में उनके पिताजी ने सुनायी थी। कहानी सुनने के बाद ही उसका आशय स्पष्ट हो पायेगा। आप भी सुनिय...
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3.4.13

त्वम्‌ चरैवेति

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विविध   विधा   के   फूल   खिले   हैं , आकर्षण के थाल सजे है, किन्तु शब्द गुञ्जित मन में, त्वम्‌ चरैवेति, त्वम्‌ चरैवेति ।।१।। भाव...
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30.3.13

मेरा परिचय

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आज से पहले अपना इतना विस्तृत परिचय किसी को नहीं दिया है। रश्मि प्रभाजी का आदेश आया तो सोच में पड़ गया, उन्हें कुछ कविताओं के साथ मेरा परिच...
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