न दैन्यं न पलायनम्

28.1.12

सुकरात संग, मॉल में

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अपने अनुशासन से बुरी तरह पीड़ित हो गया तो आवारगी का लबादा ओढ़ कर निकल भागा। कहाँ जायें, सड़कों पर यातायात बहुत है, एक दशक पहले बंगलुरु की...
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25.1.12

कुछ अध्याय मेरे जीवन के

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खुले बन्द वातायन, मन के भाव विचरना चाहें अब, कुछ अध्याय मेरे जीवन के पुनः सँवरना चाहें अब। लगता है वो सच था, जिसमें मन की हिम्मत जुटी न...
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21.1.12

भ्रष्ट है, पर अपना है

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ठंड और धुंध ने पूरा कब्जा जमाया हुआ है, हवाई जहाज को सूझता नहीं कि कहाँ उतरें, ट्रेनों को अपने सिग्नल उसके नीचे ही आकर दिखते हैं, कार ट्रक...
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18.1.12

रघुबीरजी और कूड़े का ढेर

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चायपान आधुनिक जीवनशैली का अनिवार्य अंग बन चुका है, पहले मैं नहीं पीता था पर उस कारण से हर जगह पर इतने तर्क पीने पड़ते थे कि मुझे चाय अधिक ...
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14.1.12

रघुबीरजी की कथा

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रघुबीरजी अपनी पत्नी के साथ अपने घर की बॉलकनी में बैठकर चाय की चुस्कियों का आनन्द ले रहे हैं, घर सोसाइटी की तीसरी मंजिल में है और रघुबीरजी ...
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11.1.12

ऐसी सजनी हो

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आँखों ही आँखों में मन के, भाव समझकर पढ़ जाती हो, हृद की अन्तरतम सीमा में, सहज उतरकर बढ़ जाती हो । भावों में सागर लहरों सी, सतत बहे, मधुम...
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7.1.12

स्नेह से ध्येय तक

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छात्रावास में आज अनुराग का दूसरा दिन है। कल जब पिता जी उसे यहाँ छोड़कर गये थे, तब से अनुराग को अजीब सी बेचैनी हो रही थी। अपने दस वर्ष के ज...
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4.1.12

एक चित्रकार की कहानी

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दस वर्ष का बच्चा अपनी माँ से कहे कि उसे तो बस चित्रकार ही बनना है, तो माँ को कुछ अटपटा सा लगेगा, सोचेगी कि डॉक्टर, इन्जीनियर, आईएएस बनने क...
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31.12.11

ध्यान कहाँ है पापाजी ?

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ब्लॉगजगत के ताऊजी से सदा प्रभावित रहे अतः पहली बार स्वयं ताऊ बनने पर अपने भतीजे से भेंट का मन बनाया गया। उत्तर भारत की धुंधकारी ठंड अपने स...
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28.12.11

जलकर ढहना कहाँ रुका है

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आशा नहीं पिरोना आता, धैर्य नहीं तब खोना आता, नहीं कहीं कुछ पीड़ा होती, यदि घर जाकर सोना आता,   मन को कितना ही समझाया, प्रचलित हर सिद्धा...
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24.12.11

बूढ़े बाज की उड़ान

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बाज लगभग ७० वर्ष जीता है, पर अपने जीवन के ४०वें वर्ष में आते आते उसे एक महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ता है। उस अवस्था में उसके शरीर के तीन प्...
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21.12.11

आत्मीय अनुपात

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एक बड़े होटल का परिवेश, सामने रखे विविध प्रकार के व्यंजन, विकल्पों में भ्रमित होती आपकी चयन प्रक्रिया, क्या लें, क्या न लें, किसमें कितना...
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17.12.11

शत प्रतिशत

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कितना बड़ा आश्चर्य है कि जहाँ एक ओर मन को सदा ही नयापन सुहाता है वहीं दूसरी ओर वह किसी के बारे में पुरानी धारणाओं को इतना दृढ़ कर लेता है ...
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14.12.11

हमारे पारितन्त्र

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शब्दकोष में अंग्रेजी के एक शब्द ईकोसिस्टम का हिन्दी में यही निकटतम शाब्दिक अर्थ मिला। यह कई अवयवों के ऐसे समूह को परिभाषित करता है जो एक द...
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10.12.11

आईपैड या मैकबुक एयर

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एक मित्र मिले, हमारा नया मैकबुक एयर देखे, प्रभावित हुये, बोले बड़ा हल्का है, पर जाते जाते संशय की एक कील ठोंक गये, कहे कि हल्का ही लेना थ...
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7.12.11

ब्लॉग लेखन की बाध्यतायें

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स्वयं पर प्रश्न करने वाला ही अपना जीवन सुलझा सकता है। जिसे इस प्रक्रिया से परहेज है उसे अपने बोझ सहित रसातल में डूब जाने के अतिरिक्त कोई र...
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3.12.11

गूगल का गणित

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विश्व ने सदा ही अन्वेषकों को बड़ा मान दिया है, कुछ ने लुप्त प्रजातियाँ ढूढ़ निकाली, कुछ ने लुप्त सभ्यतायें, कुछ ने जीवाणुओं को तो कुछ ने प...
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30.11.11

नये फिल्म समीक्षक

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भोजन पर सब साथ बैठे थे, टेलीविजन को विश्राम दे दिया गया था, सबकी अपनी व्यस्तता में यही समय ऐसा मिलता है जब सब एक साथ बैठकर इधर उधर की बाते...
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26.11.11

कुम्भकर्ण का श्राप

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कुम्भकर्ण शान्ति का प्रतीक था, उसे सोते रहने का वरदान मिला था। हम दैनिक रूप से जगने वालों को कुम्भकर्ण की मानसिक शान्ति की कल्पना भी नही...
80 comments:
23.11.11

चेतन भगत और शिक्षा व्यवस्था

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चेतन भगत की नयी पुस्तक रिवॉल्यूशन २०२० कल ही समाप्त की, पढ़कर आनन्द आ गया। शिक्षा व्यवस्था पर एक करारा व्यंग है यह उपन्यास। शिक्षा से क्...
64 comments:
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