न दैन्यं न पलायनम्

31.7.10

मेरे कुम्हार

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यूँ तो जीवन में जो भी मिला कुछ न कुछ सिखाता गया। प्रारम्भ माता पिता से किया और सम्प्रति बच्चों से सीख रहा हूँ। बीच में पर व्यक्तित्वों क...
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28.7.10

मध्यमवर्गीय ! हाँ बस यहीं ठीक है

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आँख बन्द करता हूँ और पूछता हूँ स्वयं से कि मैं कहाँ हूँ ? मैं कौन हूँ, यह प्रश्न पूछा जा चुका है अतः वह पुनः पूछना कॉपीराइट का उल्लंघन ह...
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24.7.10

नहीं दैन्यता और पलायन

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अर्जुन का उद्घोष था ' न दैन्यं न पलायनम् ' । पिछला जीवन यदि पाण्डवों सा बीता हो तो आपके अन्दर छिपा अर्जुन भी यही बोले संभवतः। वीर...
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21.7.10

वेल डन अब्बा

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बरसात की बलखाती फुहारें, शीत-सिरहन सिसकाती हवा, दिन का अलसाया अँधेरा, गले से गर्मी उतारती चाय, तेल की आँच में अकड़ी पकौड़ियाँ, मन में कुछ...
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17.7.10

दिन और जीवन

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मुझे एक दिन में एक जीवन का प्रतिरूप दिखता है। प्रातः उठने को यदि जन्म माने और रात्रि सोने को मृत्यु तो पूर्वाह्न, अपराह्न और सायं क्रमश...
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14.7.10

खिलौनों की वेदना - Toy Story 3

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खिलौने बतिया रहे हैं कि अब उन्हें उतना प्यार नहीं मिलता है जितना पहले मिलता था। बच्चा महोदय अब बड़े हो गये हैं और उनकी प्...
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10.7.10

फुटबॉलीय उत्सव

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वर्ल्डकप समापन की ओर बढ़ रहा है। यूरोपियन पॉवर गेम ने लैटिन अमेरिका के स्किल गेम को धूल धूसरित कर दिया है। दर्शकों का उन्माद चरम पर ह...
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8.7.10

पिक्चर अभी बाकी है, मेरे दोस्त

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मेरे 28 घंटों पर सुधीजनों ने अपना वाणी अमृत बरसा उन्हें पुनः जीवित कर दिया । प्रभात की चैतन्यता, शीतल बयार और आप सभी की टिप्पणी अस्तित्व...
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