न दैन्यं न पलायनम्

21.3.12

होली के उन्माद में नाचना

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नृत्य और संगीत, कहते हैं कि स्वर्ग की एक भेंट है, हम पृथ्वीवासियों के लिये। स्वर्ग में हर पग नृत्य है और हर बोल संगीत। कई विधायें हैं, संस...
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17.3.12

आज जी भर देख लेते

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हम हृदय का उमड़ता आवेग कुछ पल रोक लेते, समय यदि कुछ ठहर जाता, आज जी भर देख लेते। तुम न ऐसे मुस्कराती, सकपका पलकें झपाती, ना फुलाकर गाल...
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14.3.12

अपूर्ण एक पूर्ण शब्द है

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बचपन और युवावस्था में एक बीमारी बहुधा सबको ही होती है कि बड़ा खाली खाली सा लगता है। एक के बाद एक कोई न कोई कार्य मिलते रहना चाहिये, व्यस्त...
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10.3.12

सोझ समझ कर पीना, यह चम्बल का पानी है

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जब भूगोल पढ़ना प्रारम्भ किया तब कहीं जाकर समझ में आया कि बचपन में जो भी पानी हमने पिया, वह यमुना का नहीं चम्बल का था। आगरा की यमुना में कु...
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7.3.12

अम्मा, गूगल और वेलु का पंजाबी ढाबा

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रेलवे में निरीक्षण का कार्य अत्यन्त गहन होता है। आवश्यक भी है, यदि आपके संसाधन विस्तृत क्षेत्र में फैले हों। ट्रैक पर लगी एक एक क्लिप पर...
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3.3.12

परीक्षा की विधियाँ

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कुछ लोग होते हैं जिन्हें परीक्षा का तनिक भी भय नहीं होता है, अंक भले ही कितने आयें। मार्च-अप्रैल की नीरवता में डूबी गर्म दुपहरियों में य...
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29.2.12

आस धुआँ, हर साँस धुआँ

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रघुबीरजी के लिये कूड़े के ढेर का प्रकरण अन्ततः एक चिरकालिक शान्ति लाया, यद्यपि इसके लिये उन्हें नगर निगम के अधिकारी के साथ मिलकर सारा भ्र...
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25.2.12

परीक्षा

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परीक्षा श्रेष्ठता सिद्ध करने की विधि है, श्रेष्ठ होने की अनिवार्यता नहीं है। यह दर्शन का वाक्य नहीं, हम सबके दैनिक अनुभव की विषयवस्तु है। ...
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22.2.12

फेसबुक, आपको भी धन्यवाद और विदा

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नकारात्मकता से सदा ही बचना चाहता हूँ, बहुत प्रयास करता हूँ कि किसे ऐसे विषय पर न लिखूँ जिसमें पक्ष और विपक्ष के कई पाले बना कर विवाद हो, व...
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18.2.12

मटर की फलियाँ

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सप्ताहन्त का एक दिन नियत रहता है, सब्जी, फल और राशन की खरीददारी के लिये, यदि संभव हो सके तो शनिवार की सुबह। जब आईटी शहर के नागरिक शुक्रव...
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15.2.12

लहरों से खेलना

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सागर से साक्षात्कार उसकी लहरों के माध्यम से ही होता है। किनारे पर खड़े हो विस्तृत जलसिन्धु में लुप्त हो जाती आपकी दृष्टि, कुछ कुछ कल्पनालो...
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11.2.12

क्लाउड का धुंध

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विकल्प की अधिकता भ्रम उत्पन्न करती है, भ्रम स्पष्ट दिशा ढाँक देता है, भ्रम सोचने पर विवश करता है, भ्रम निर्णय लेने को उकसाता है, भ्रम का ध...
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8.2.12

ब्लॉगिंग - एक हिसाब

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ज्ञानदत्तजी  बंगलुरु में थे, पिछले दो दिन। जब आप यह पोस्ट पढ़ रहे होंगे, उनकी ट्रेन सुन्दर दृश्यों को अपने दोनों ओर बराबर से बाँटती हुयी...
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4.2.12

पहले तीन में आओ, आईपैड मिल जायेगा

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एप्पल ने शिक्षा के क्षेत्र में पहल करते हुये आईबुक ऑथर के नाम से एक सुविधा प्रारम्भ की है। इस एप्लीकेशन के माध्यम से आप कोई पुस्तक बड़ी आस...
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1.2.12

गर्दन की मोच

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यह तो निश्चित और सिद्ध था कि गर्दन की मोच नहाते समय ही आयी थी, क्योंकि पहले के गतिशील और बाद के गतिहीन जीवन के बीच वही एक स्पष्ट बिन्दु था...
67 comments:
28.1.12

सुकरात संग, मॉल में

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अपने अनुशासन से बुरी तरह पीड़ित हो गया तो आवारगी का लबादा ओढ़ कर निकल भागा। कहाँ जायें, सड़कों पर यातायात बहुत है, एक दशक पहले बंगलुरु की...
70 comments:
25.1.12

कुछ अध्याय मेरे जीवन के

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खुले बन्द वातायन, मन के भाव विचरना चाहें अब, कुछ अध्याय मेरे जीवन के पुनः सँवरना चाहें अब। लगता है वो सच था, जिसमें मन की हिम्मत जुटी न...
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21.1.12

भ्रष्ट है, पर अपना है

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ठंड और धुंध ने पूरा कब्जा जमाया हुआ है, हवाई जहाज को सूझता नहीं कि कहाँ उतरें, ट्रेनों को अपने सिग्नल उसके नीचे ही आकर दिखते हैं, कार ट्रक...
76 comments:
18.1.12

रघुबीरजी और कूड़े का ढेर

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चायपान आधुनिक जीवनशैली का अनिवार्य अंग बन चुका है, पहले मैं नहीं पीता था पर उस कारण से हर जगह पर इतने तर्क पीने पड़ते थे कि मुझे चाय अधिक ...
62 comments:
14.1.12

रघुबीरजी की कथा

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रघुबीरजी अपनी पत्नी के साथ अपने घर की बॉलकनी में बैठकर चाय की चुस्कियों का आनन्द ले रहे हैं, घर सोसाइटी की तीसरी मंजिल में है और रघुबीरजी ...
76 comments:
11.1.12

ऐसी सजनी हो

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आँखों ही आँखों में मन के, भाव समझकर पढ़ जाती हो, हृद की अन्तरतम सीमा में, सहज उतरकर बढ़ जाती हो । भावों में सागर लहरों सी, सतत बहे, मधुम...
99 comments:
7.1.12

स्नेह से ध्येय तक

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छात्रावास में आज अनुराग का दूसरा दिन है। कल जब पिता जी उसे यहाँ छोड़कर गये थे, तब से अनुराग को अजीब सी बेचैनी हो रही थी। अपने दस वर्ष के ज...
65 comments:
4.1.12

एक चित्रकार की कहानी

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दस वर्ष का बच्चा अपनी माँ से कहे कि उसे तो बस चित्रकार ही बनना है, तो माँ को कुछ अटपटा सा लगेगा, सोचेगी कि डॉक्टर, इन्जीनियर, आईएएस बनने क...
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